Controversy between Israel and Palestine
Controversy between Israel and Palestine

Controversy between Israel and Palestine

इज़राइल और फिलिस्तीन के मध्य विवाद...

इज़राइल और फिलिस्तीन दोनों एक दूसरे के धुर विरोधी हैं... इज़राइल जहाँ यहूदी बाहुल्य हैं वहीं फिलिस्तीन मुस्लिम बाहुल्य... दोनों के मध्य कई विवाद हैं जैसे जेरुसलम, गाजा पट्टी...... इज़राइल का समर्थन अमेरिका सहित उसके सहयोगी देश करते रहे हैं वहीं फिलिस्तीन का समर्थन गल्फ देश,मुस्लिम देश,रूस,चीन करते आ रहे हैं... भारत ने भी फिलिस्तीन का ही समर्थन किया हैं अंतराष्ट्रीय स्तर पर...

कल भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ में खुले तौर पर इज़राइल के पक्ष में मतदान करके, फिलिस्तीन को समर्थन देने वाली पुरानी नीति को किनारे कर दिया... दरअसल फिलिस्तीन का एक NGO हैं जिसका नाम "शहीद" हैं... फिलिस्तीन चाहता हैं कि इस संगठन को संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक व सामाजिक परिषद में पर्यवेक्षक राज्य का दर्जा हासिल हो...इस हेतु फिलिस्तीन ने L15 नामक प्रस्ताव UN में लाया था.. इस पर हुए मतदान में भारत ने इज़राइल के पक्ष में मतदान किया... अंततः प्रस्ताव 28-14 से ख़ारिज हो गया... इसके पक्ष में जहां रूस,चीन,सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे देश थे तो विरोध में अमेरिका, भारत और अमेरिकी सहयोगी यूरोपीय देश थे...

इज़राइल इस संगठन को आतंकी संगठन मानता हैं... ऐसे में भारत जो कि आतंक के विरुद्ध जूझ रहा हैं.. अगर फिलिस्तीन को समर्थन देता तो भारत के दोहरा चरित्र होने का संदेश दुनियां के समक्ष जाता.. और आतंक के विरुद्ध भारत की लड़ाई कमजोर होती... अतः ऐसा करना आवश्यक और जरूरी था भारत के लिए.. वर्तमान परिदृश्य में भारत को फिलिस्तीन की बजाय ज़्यादा आवश्यकता इज़राइल से हैं.. चाहे आर्थिक क्षेत्र हो या कृषि क्षेत्र या जल संरक्षण या मरुस्थलीकरण या हथियार या तकनीकी.हर क्षेत्र में भारत को बहुत जरूरत हैं इज़राइल से... अतः ऐसा करना सार्थक था..

 

सादर
Ganpat Singh