Geographical Indication (भौगोलिक संकेतक) GI Tag

Geographical Indication (भौगोलिक संकेतक) GI Tag

Geographical Indication (भौगोलिक संकेतक) GI Tag              

Slogan:- अतुल्य भारत की अमूल्य निधि (Invaluable Treasures of Incredible India)

 

चर्चा में क्यों ?

हाल में ही ओडिशा को अपने ‘रसगुल्ले’ के लिये बहुप्रतीक्षित भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिल गया है। यह प्रमाणपत्र 22 फरवरी, 2028 तक वैध रहेगा। गौरतलब है कि GI टैग किसी वस्तु के किसी खास क्षेत्र या इलाके में विशिष्टता होने की मान्यता देता है।

ध्यातव्य रहे की वर्ष 2015 से ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच रसगुल्ले का मूल स्थान होने को लेकर विवाद चलता रहा है। पश्चिम बंगाल को वर्ष 2017 में उसके ‘रसगुल्ले’ के लिये GI टैग प्राप्त हुआ था।

Note:- ओडिशा में ‘रसगुल्ला’ भगवान जगन्नाथ के लिये निभाई जाने वाली राज्य की सदियों पुरानी परंपराओं का हिस्सा रहा है और इसका उल्लेख 15वीं सदी के उड़िया काव्य ‘दांडी रामायण’ में भी है।

 

अर्थ/परिभाषा (Meaning/Definition):-

एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में Agriculture, Natural or Artificial Product से है।

GI Tag का इस्तेमाल ऐसे उत्पादों के लिए किया जाता है, जिनका एक विशिष्ट भौगोलिक मूल क्षेत्र होता है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर GI का विनियमन (Regulation) World Trade Organization (WTO) के बौद्धिक सम्पदा अधिकारों (Intellectual Property Rights) के व्यापार संबंधी पहलुओं TRIPS पर समझौते के तहत किया जाता है।

TRIPS : Trage-Related Aspects of Intellectual Property Rights

भारत WTO के सदस्य होने के नाते ‘वस्तुओं का भौगोलिक सूचक’ (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 Geographical Indications of goods 'Registration & Protection' Act, 1999 के तहत किया जाता है, जो 15 सितम्बर, 2003 से लागू हुआ।

Note : वर्ष 2004 में 'Dareeling Tea' GI Tag प्राप्त करने वाला पहला भारतीय उत्पाद है।

Note : GI Tag का पंजीकरण 10 वर्ष के लिए मान्य होता है।

 1.कड़कनाथ मुर्गा:- यह मूल रूप से मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले का मुर्गा है। यह मुर्गा दरअसल अपने स्वाद और सेहतमंद गुणों के लिए विख्यात है। यह भारत का एकमात्र काले माँस वाला चिकन है।

Note : इसके मीट में सफेद चिकन के मुकाबले Cholesterol (कोलेस्ट्रॉल) का स्तर कम होता है और Amino Acid का स्तर ज्यादा होता है।

2.बिहार की ‘‘शाही लीची”:- इसका उत्पादन मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, वैशाली, समस्तीपुर तथा बेगुसराय जिलों में किया जाता है।

Note : बिहार में देश की कुल लीची का 40% उत्पादन होता है।

इससे पहले:- कतरनी चावल, जरदालू आम और मगही पान को GI Tag मिल चुका है।

3.कोंकण के अल्फांसों आम:- महाराष्ट्र के रत्नागिरी, सिंधु दुर्ग, पालघर, ठाणे और रायगढ़ जिलों में मिलता है।

Note : अल्फांसों आम को फलों का राजा माना जाता है। महाराष्ट्र में इसे ‘हापुस’ नाम से भी जाना जाता है।

4.Kandhamal Haldi Odisa:-  कंधामल जनजाति द्वारा परम्परागत तरीके से इसका उत्पादन किया जाता है।

5.सिलाव खाजा व्यंजन:-  बिहार का मिष्ठान है।

इसकी शुरूआत उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिले तथा बिहार के पश्चिमी जिलों से हुई।

इसका निर्माण गेहूँ के आटे, मैदा, चीनी तथा इलायची इत्यादि से किया जाता है।

6.Sirsi Supari (सिरसी सुपारी):–  कर्नाटक के उत्तरी कन्नड़ में उत्पादित सिरसी सुपारी को GI Tag मिला।

Note : पहली बार किसी सुपारी को GI Tag दिया गया है।

यह सुपारी येलापुरा, सिद्दापुर एवं सिरसी में उत्पादित होती है।

यह गोलाकार तथा सिक्का की तरह सपाट होती है, जो अन्य किसी भी प्रकार की सुपारी में नहीं पायी जाती है

7.मरयूर गुड़ (Marayur Jaggery):– केरल राज्य इडुक्की जिले में सदियों से पारम्परिक विधि द्वारा तैयार किया जाता है।

8.इरोड़ हल्दी (Erode Turmeric):- Tamilnadu State

तमिलनाडु के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में अवस्थित इरोड़ जिले (पुराना नाम पेरियर) में उत्पादित होने वाली हल्दी को GI Tag मिला है।

9.थिरूभुवनम रेशमी साड़ी:– Tamilnadu State

यहाँ की साड़ियाँ शुद्ध जरी के धागों का इस्तेमाल करते हुए विस्तृत डिजाइन के साथ बनाई और पहनी जाने वाली पारम्परिक साड़ियाँ है।

10.पाँच किस्मों की कॉफी:-

1. कूर्ग अरेबिका कॉफी (कर्नाटक)

2. बाबुबुदांगिरिस अरेबिका कॉफी (कर्नाटक)

3. चिकमगलूर अरेबिका कॉफी (कर्नाटक)

4. अरकू वैली अरेबिका कॉफी (AP & OD)

5. वायनाड रोबस्टा कॉफी (Wayanad Robusta Coffee) (केरल)

Note:- भारत में कॉफी की खेती लगभग 4.54 लाख हैक्टेयर में 3.66 लाख कॉफी किसानों द्वारा की जाती है। जिनमें से 98% छोटे किसानों द्वारा उत्पादन होता है।

कॉफी उत्पादक  प्रमुख राज्य:-

कर्नाटक = 54%

केरल = 19%

AP & OD = 17.2%

तमिलनाडु  = 8%

उत्तर-पूर्व राज्यों = 1.8%