Current affairs/Daily Current  Affairs - 23 May 2019

Current affairs/Daily Current Affairs - 23 May 2019

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस:- 22 मई

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस या विश्व जैव विविधता संरक्षण दिवस 22 मई को मनाये जाने वाला अन्तर्राष्ट्रीय पर्व है। जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 20 दिसंबर 2000 को प्रारंभ किया गया था।

मुख्य बिंदु:- 
जैव-विविधता (जैविक-विविधता) का शाब्दिक अर्थ है की,जीवों के बीच में पायी जाने वाली विभिन्नता है जोकि प्रजातियों में, प्रजातियों के बीच और उनकी पारितंत्रों की विविधता को भी समाहित करती है।
सीधे एवं सार्थक शब्दों में इसका अर्थ है की,जैव विविधता सभी जीवों एवं पारिस्थितिकी तंत्रों की विभिन्नता और असमानता को कहा जाता है।

जैव विविधता का उद्देश्य:-
इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसे पर्यावरण का निर्माण करना है, जो जैव विविधता में समृद्ध, टिकाऊ एवं आर्थिक गतिविधियों हेतु विशेष अवसर प्रदान कर सके।जिसमें विशेष तौर पर वनों की सुरक्षा, संस्कृति, जीवन के कला शिल्प, संगीत, वस्त्र-भोजन, औषधीय पौधों का महत्व आदि को   प्रदर्शित करके जैव-विविधता के महत्व और उसके न होने पर होने वाले खतरों के बारे में जागरूक पैदा करता है।

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस-2019 का विषय:- 

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस-2019 का विषय या Theme “हमारी जैव विविधता, हमारा खाद्य एवं हमारा स्वास्थ्य (Our Biodiversity, Our Food, Our Health)” हैं। इस वर्ष की थीम का मुख्य उद्देश्य हमारी खाद्य प्रणाली में बदलाव और मानव स्वास्थ्य में सुधार के उत्प्रेरक रूप में भोजन व स्वास्थ्य के आधार के रूप में जैव विविधता को रखना हैं।

 

राडार इमेजिंग उपग्रह RISAT-2B

चर्चा में क्यों?
हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( Indian Space Research Organization ) ने पुलीकट झील के मध्य स्थित श्रीहरिकोटा द्वीप से पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-कोर अलोन (Polar Sattelite Launch Vehicle-Core Alone-PSLV-CA) वैरिएंट का उपयोग करते हुए राडार इमेजिंग अर्थ आब्जर्वेशन उपग्रह, RISAT-2B लॉन्च किया है।

 

RISAT-2B:-

RISAT-2B, RISAT-2BR1, 2BR2, RISAT-1A, 1B, 2A के बाद लॉन्च किया जाना है।

इसरो के मुताबिक RISAT-2B को पृथ्वी से लगभग 555 किमी ऊँचाई वाली कक्षा में स्थापित किया गया है। जो अपनी कक्षा में 37 डिग्री के कोण पर झुका होगा।
इस उपग्रह के अंतरिक्ष में स्थापित होने से देश की आंतरिक सुरक्षा एवं आपदा राहत कार्य में लगे लोगों सुरक्षाबलों की टोही एवं निगरानी क्षमता बढ़ेगी तथा साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी शिविरों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकती है।

यह एक्स बैंड सिंथेटिक अपर्चर राडार (SAR) युक्त उपग्रह है जिसका उपयोग धरती पर नज़र रखने के लिये किया जाएगा जो बादलों के आच्छादित रहने पर भी इस उपग्रह की मदद से पृथ्वी पर नज़र रखेगा। जिससे सीमाओं पर होने वाली किसी भी गतिविधि का पता लगाया जा सकेगा।
RISAT-2B उपग्रह भी एक्स बैंड सिंथेटिक अपर्चर राडार उपग्रह है जो देश की इमेजिंग और टोही क्षमता को बढ़ाएगा।

महत्वपूर्ण तथ्य:- 

वर्ष 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के पश्चात इसरो ने अप्रैल 2009 को RISAT-2 उपग्रह लॉन्च किया था जिससे सशस्त्र बलों को काफी मदद मिली। हालाँकि तब इसरो की योजना स्वदेशी तकनीक से विकसित ‘सी बैंड’ सिंथेटिक अपर्चर राडार उपग्रह RISAT-1 लॉन्च करने की थी, लेकिन यह भारतीय उपग्रह तैयार नहीं था।
भारत ने इज़राइली एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ से एक्स बैंड सिंथेटिक अपर्चर राडार लिया जिसे RISAT-2 में इंटीग्रेट कर छोड़ा गया।