Current affairs/Daily Current Affairs - 30 May 2019

Current affairs/Daily Current Affairs - 30 May 2019

आकाश मिसाइल के नए संस्करण का सफलता पूर्वक परीक्षण

चर्चा में क्यों ?
हाल ही में The Defence Research and Development Organisation (DRDO) द्वारा आकाश-1S मिसाइल का सफलता पूर्वक परीक्षण किया गया है।
♦️इस मिसाइल को उड़ीसा के चाँदीपुर (बालासोर) से छोडा गया है।
आकाश मिसाइल:-
♦️आकाश प्रक्षेपास्त्र भारत द्वारा निर्मित एक स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।
♦️यह मध्यम दूर की सतह से हवा (Surface-to-Air missile) में मार करने वाली प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है। जिसे भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा तैयार किया गया है।
♦️आकाश मिसाइल 30 किलोमीटर की एक अवरोधक सीमा के साथ सतह-से-हवा में मारक क्षमता वाली मिसाइल है।
♦️यह मिसाइल प्रणाली किसी भी विमान को 30 किमी दूर व 18,000 मीटर ऊंचाई तक टारगेट कर मारने में सक्षम है। इसमें माध्यम से लड़ाकू जेट विमानों, क्रूज मिसाइलों और हवा से सतह वाली मिसाइलों के साथ-साथ बैलिस्टिक मिसाइलों जैसे हवाई लक्ष्यों को बेअसर करने की क्षमता है।
♦️वर्तमान में यह मिसाइल भारतीय थल सेना और भारतीय वायु सेना के साथ परिचालन सेवा में है। परन्तु भारतीय जल सेना इससे अब भी अछूती है।
♦️आकाश मिसाइल का वज़न 720 किलोग्राम, तथा व्यास 35 सेमी व लम्बाई 5.78 मीटर है। 
DRDO:-
♦️ यह भारत की रक्षा से जुड़े अनुसंधान कार्यों के लिये देश की अग्रणी संस्था है।जो भारतीय रक्षा मंत्रालय की एक आनुषांगिक ईकाई के रूप में काम करता है।
♦️ DRDO की स्थापना सन् 1958 में की गई थी। जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
♦️इसका स्लोगन:-बलस्य मूलम विज्ञानम्
(बल के मूल में विज्ञान है।)

Note:- इससे पहले एक आर्टिकल DRDO द्वारा सुखोई लड़ाकू विमान से निर्देशित बम (Guided bomb) का सफल परीक्षण किया गया उस पर था जिसका लिंक नीचे दिया गया है, आप यहाँ जाकर इसे पढ़ सकते है:- https://srijanias.com/post/current-affairs-daily-top-Current-news-7

 

 
भारतीय विरासत और संस्कृति:-ओरछा की स्थापत्य विरासत


चर्चा में क्यों ?
हाल ही में यूनेस्को ( United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization- UNESCO ) द्वारा मध्यप्रदेश के ओरछा शहर की स्थापत्य विरासत को विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है।
◾️ध्यातव्य है कि यदि किसी भी ऐतिहासिक विरासत या स्थल को विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल होने/स्थान मिलने से पहले अस्थायी सूची में शामिल होना आवश्यक होता है। अस्थायी सूची में शामिल होने के बाद ही नियमानुसार विभिन्न प्रक्रियाएँ पूरी कर एक मुख्य प्रस्ताव यूनेस्को को भेजा जाता है।
प्रमुख बिन्दु:-
◾️यह मध्यप्रदेश के ओरछा शहर की स्थापत्य शैली है जिसका निर्माण बुंदेल राजवंश (Bundela Dynasty) द्वारा किया गया था। 
◾️यह स्थापत्य शैली बुंदेल राजवंश (Bundela Dynasty) द्वारा अपनाई गई वास्तुकला की एक विशिष्ट शैली है।
◾️मध्यप्रदेश का यह ओरछा शहर बेतवा नदी के तट पर स्थित है जिसका निर्माण 16 वीं शताब्दी में बुंदेल वंश के राजा रुद्र प्रताप सिंह द्वारा कराया गया था।
◾️ यदि मध्यप्रदेश के इस स्थल को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की अंतिम सूची में शामिल किया जाता है, तो यह यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में शामिल होने वाला भारत का 38वाँ स्थल होगा।
◾️वर्तमान में यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में 37 भारतीय विरासत स्थलों को शामिल किया हुआ है, जिनमे से मध्यप्रदेश के तीन प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल है-
 
1. खजुराहो के स्मारकों का समूह (Khajuraho Group of Monuments) 
2. सांची का बौद्ध स्मारक (Buddhist Monuments at Sanchi) 
3. भीमबेटका के शैलाश्रय (Rock Sheltersp of Bhimbhetka)