Chakrashila Wildlife Sanctuary and Golden Langur 11 June 2019 Current affairs

Chakrashila Wildlife Sanctuary and Golden Langur 11 June 2019 Current affairs

चक्रशिला वन्यजीव अभयारण्य
चर्चा में क्यों ?
हाल ही में असम राज्य के चक्रशिला वन्यजीव अभयारण्य में गोल्डेन लंगूर/सुनहरे लंगूर (golden langur), जो की ‘मनरेगा’ अर्थात महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत पहली बार गैर-मानव लाभार्थी होने जा रहा है।
मुख्य बिन्दु:-
♦️ गोल्डेन लंगूर/सुनहरे लंगूर (golden langur) असम राज्य में ब्रह्मपुत्र नदी के आसपास वाले क्षेत्रों में सर्वाधिक पाया जाता है। परन्तु वर्तमान समय में इनकी संख्या काफ़ी तेजी से घटती जा रही है। 
♦️इनकी संख्या के घटने का मुख्य कारण भोजन का पर्याप्त न मिल पाना है, जिसके लिए इन्हें भोजन की तलाश में बाहर जाकर अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। 
♦️वर्तमान समय में इनकी सर्वाधिक संख्या असम के चक्रशिला वन्यजीव अभयारण्य में है।

♦️इस वन्यजीव अभयारण्य के परिसर में विलुप्तप्राय: सुनहरे लंगूरों के अस्तित्व को बचाने के लिए जल्द ही एक प्रजनन केन्द्र खोला जाएगा।
♦️असम के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने राज्य में गोल्डन लंगूर संरक्षण कार्यक्रम (Golden Langur Conservation Project-GLCP) की सफलता की घोषणा कर दी है।
♦️ 5 जून, 2019 को असम के जिला प्रशासन ने मनरेगा योजना के तहत 24-27 लाख रुपये की परियोजना को मंज़ूरी प्रदान की है। जिसके तहत काकोईजियाना रिजर्व फॉरेस्ट (Kakoijana Reserve Forest) में अमरूद, आम, ब्लैकबेरी एवं अन्य फलों के 10575 पेड़ लगाए जाएंगे। जिससे गोल्डेन लंगूर को भोजन के लिए बाहर जाकर अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी पड़ेगी।
गोल्डन लंगूर:-
♦️ गोल्डन लंगूर का वैज्ञानिक नाम ट्रेचिपिथेकस गीई (trachypithecus geei) है, जो पश्चिमी असम और भारत-भूटान की सीमा से सटे इलाकों में पाया जाता है। 
♦️यह प्रजाति असम में उमानंदा द्वीप एवं बोंगाइगांव जिला में स्थित काकोईजियाना रिजर्व फॉरेस्ट में पाई जाती है। जो भारतीय वैज्ञानिक समुदाय द्वारा हाल ही में खोजे गए प्राइमेट्स में से एक है।
♦️इस लंगूर की खोज 1953 में ई.पी.गी द्वारा औपचारिक रूप से की गई थी। IUCN की लाल सूची में इस प्रजाति को संकटापन्न (Endangered) की श्रेणी में रखा गया है।
♦️हाल के वर्षों में कई एनजीओ और प्राइमेटोलॉजिस्टों ने असम के आसपास कई खंडित वन अधिवासों में प्राइमेट्स के संरक्षण के लिये काम शुरू किया है।
मनरेगा ( MGNREGA ):-
♦️मनरेगा अर्थात महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम जिसकी शुरुआत 2 अक्टूबर 2005 को हुई थी।
♦️इसे पहले राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) कहा जाता था, लेकिन 2 अक्टूबर 2009 को इसका पुनः नामकरण किया गया, जिसके बाद से इसे MGNREGA कहा जाता है।
♦️इस योजना में प्रत्येक परिवार को 100 दिनों का रोजगार (या बेरोजगारी भत्ता) सक्षम और इच्छुक श्रमिकों को हर वित्तीय वर्ष में प्रदान किया जाता है।
♦️यह अधिनियम, राज्य सरकारों को "मनरेगा योजनाओं" को लागू करवाने का निर्देश देता है। जिसके तहत, केन्द्र सरकार मजदूरी की लागत, माल की लागत का 3/4 और प्रशासनिक लागत का कुछ प्रतिशत वहन करती है। जबकि राज्य सरकारें बेरोजगारी भत्ता, माल की लागत का 1/4 और राज्य परिषद की प्रशासनिक लागत को वहन करती है।