Bombay blood group

Bombay blood group

क्या है रक्त समूह

रक्त समूह , रक्त का एक वर्गीकरण है जो रक्त की लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर पाये जाने वाले पदार्थ मे वंशानुगत प्रतिजन की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर आधारित होता है।

● सबसे पहले 1901 में रक्त समूह की जानकारी प्राप्त हुई, उसके बाद से इसमें कई शोध और प्रयोग होते रहे है। सामान्यतः रक्त समूह 8 तरह के होते हैं - ए, बी, एबी और ओ इनमे पॉजिटिव या निगेटिव भी होते है।

● लेकिन हाल ही में रेयरेस्ट ऑफ रेयर ब्लड टाइप सुर्ख़ियो में जिसे बॉम्बे ब्लडग्रुप कहा जाता है। यह रक्त समूह बहुत ही मुश्किल से मिलता है जितना ओ निगेटिव का मिलना जितना मुश्किल है, उतना ही ये रक्त समूह भी रेयरेस्ट है।

क्या है बॉम्बे ब्लड ग्रुप:- 

● आठ तरह के ब्लड ग्रुप में बॉम्बे ब्लड ग्रुप (Hh) अत्यधिक दुर्लभ है। ये ब्लड टाइप विश्व में सिर्फ 0.0004 फीसदी लोगों में ही पाया जाता है।

● भारत में 10,000 लोगों में केवल एक व्यक्ति का ब्लड बॉम्बे ब्लड टाइप का होगा। इसे Hh ब्लड टाइप भी कहते है या फिर रेयर ABO ग्रुप ब्लड भी कहा जाता है।

● सर्वप्रथम डॉक्टर वाई एम भेंडे ने 1952 में इसकी सबसे पहले खोज की थी। यह महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश के चुनिंदा हिस्सों में रहने वाले कुछ लोगों में मिलता है। और हाल ही की शोध से पता चला है की विश्व में इनकी संख्या सिर्फ 10 हजार है।

● ABO ग्रुप ब्लड को बॉम्बे ब्लड ग्रुप इसलिए कहा जाता है क्योंकि सबसे पहले यह बॉम्बे के कुछ लोगों में पाया गया था। इस ब्लड टाइप के भीतर पाई जाने वाली फेनोटाइप रिएक्शन के बाद यह पता चला की इसमें एक H एंटीजेन होता है। 

● इनकी लाल कोशिकाओं (RBC) में एबीएच एंटीजन होते हैं और उनकी सीरा में एंटी-ए, एंटी-बी और एंटी-एच होते है। एंटी-एच को ABO समूह में नहीं खोजा गया है, लेकिन प्रीट्रांसफ्यूज़न टेस्ट में इसके बारे में पता चला है। 

● यही H एंटीजन ABO ब्लड समूह में बिल्डिंग ब्लॉक का काम करते है। एच एंटीजन की कमी "बॉम्बे फेनोटाइप" के रूप में जानी जाती है।

● यह सर्वप्रथम बॉम्बे के कुछ लोगों में पाया गया था इसलिए इसे बॉम्बे ब्लड कहा जाता है। सूत्रों के मुताबिक़ यह ज्ञात हुआ है की, बॉम्बे ब्लड ग्रुप के लोगों में शुगर मॉलिक्यूल्स नहीं बन पाते। 

● इसलिए इनमें कैपिटल एच एंटीजन नहीं होता और वो किसी भी ब्लडग्रुप में नहीं आते लेकिन, उनके प्लाज़्मा में एंटीबॉडी ए, बी और एच होते हैं। 

● इस ब्लड ग्रुप वालों की ज़िंदगी बिल्कुल सामान्य होती है। उन्हें शारीरिक तौर पर कोई समस्या नहीं होती। 

● ध्यातव्य रहे की जिन लोगों में बॉम्बे ब्लड ग्रुप होता है उनमें ए, बी, एच एंटीजन नहीं होते। इसलिए जांच में भी ए, बी, एबी ब्लड ग्रुप नहीं आता। इसलिए ओ ग्रुप होने का भ्रम हो जाता है।

बॉम्बे ब्लड ग्रुप रक्तदाता:-

● बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाला व्यक्ति ABO ब्लड ग्रुप वाले को ब्लड दे सकता है। परन्तु इनसे ब्लड ले नहीं सकता है। यह सिर्फ अपने ही ब्लड ग्रुप यानी Hh ब्लड टाइप वालों से ही ब्लड ले सकता हैं। 

● डॉक्टर्स का मानना है की बॉम्बे ब्लड ग्रुप दुर्लभ है तो क्या इसे लंबे समय के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है। क्रायो प्रिजर्वेशन नाम से एक तकनीक है जिसमें एक साल के लिए ब्लड को संरक्षित रख सकते हैं। इसमें ब्लड को बहुत कम तापमान पर रखा जाता है। लेकिन, भारत में इसका इस्तेमाल बहुत कम जगह होता है। वहीं, सामान्य तौर पर लाल रक्त कणिकाओं को 35 से 42 दिन के लिए संरक्षित रख सकते हैं।

● ये चर्चाओं में इसलिए है क्यूकि हाल ही में इसकी 2 यूनिट भारत से म्यांमार भेजी गईं है। ये रक्त भारत में संकल्प इंडिया फ़ाउंडेशन से संपर्क करने पर मिला। ये फ़ाउंडेशन बॉम्बे ब्लड रखने वाले ब्लड बैंक, डोनर्स और ज़रूरत मंदों के बीच संपर्क बनाने का काम करता है। BombayBloodGroup.Org वेबसाइट के ज़रिए इस प्रक्रिया को चलाया जाता है।