हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (Housing Finance Companies) के तरलता संकट (Liquidity Crisis)

हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (Housing Finance Companies) के तरलता संकट (Liquidity Crisis)

हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (Housing Finance Companies) के तरलता संकट (Liquidity Crisis)


चर्चा में क्यों ?

हाल ही में हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में तरलता संकट की स्थिति बनी हुई है, जिसका मुख्य कारण  हाउसिंग फाइनेंस ग्रुप की चालु वित्त वर्ष में रफ़्तार सुस्त है।
♦️ इनके तरलता संकट (Liquidity Crisis) को ध्यान में रखकर भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India - RBI) ने यह निर्णय लिया है कि वह दैनिक आधार पर इन कंपनियों की तरलता स्थिति, परिसंपत्ति-देयता (Asset-Liability) का अंतर और पुनः भुगतान अनुसूची (Repayment Schedules) की निगरानी करेगा।


तरलता संकट (Liquidity Crisis) क्या है ?

 
यह एक ऐसी वित्तीय स्थिति को दर्शाता है , जिसमें तरलता प्रवाह में कमी आ जाती है। किसी एक कंपनी/संस्थान ( व्यापारिक ) के लिये इसका शाब्दिक अर्थ है कि उसके पास तरलता परिसंपत्तियों की कमी हो जाना जिसके परिणाम स्वरूप कंपनी अपने ज़रूरी कार्य जैसे कर्मचारियों के वेतन, ऋणों के भुगतान आदि को भी चुकाने की स्थिति में नहीं होती है। ऐसी स्थिति को तरलता संकट (Liquidity Crisis) कहते है।

 

मुख्य बिन्दु 

♦️सामान्यत: ऐसी कंपनियों को राष्ट्रीय आवास बैंक (National Housing Bank- NHB) द्वारा विनियमित और संचालित किया जाता है, परंतु इनका तरलता संकट बैंकों सहित वित्तीय क्षेत्र के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है, जिसके कारण अर्थव्यवस्था की वित्तीय स्थिरता में भी परिवर्तन आने की संभावना होती है, ऐसी स्थिति में RBI द्वारा इन पर नज़र रखना आवश्यक हो जाता है।
♦️ RBI ने NBFS [ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) ] के संकट से जूझते हुए अर्थव्यवस्था की वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने पर ज़ोर दिया है।
नोट:- NBFS ऐसी संस्थाओं को कहा जाता है, जो कंपनी अधिनियम 1956 के अंतर्गत पंजीकृत होती है और जिसका प्रमुख कार्य उधार देना तथा विभिन्न प्रकार के शेयरों, प्रतिभूतियों, बीमा कारोबार तथा चिटफंड से संबंधित क्षेत्र में निवेश करना होता है।

RBI द्वारा इसके उपाय:-

1:- ब्याज दरों में कटोती करना
2:- सरकारी बॉंड या जमा योजनाओं में निवेश करना, जिसके कारण नक़दी संकट के समय पर्याप्त पूँजी हो।

RBI:-

♦️ भारतीय रिजर्व बैंक ( Reserve Bank of India ) भारत का एक केन्द्रीय बैंक है, जो भारत के सभी बैंकों का संचालक है। रिजर्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्त्रित करता है।
♦️RBI की स्थापना हिल्टन यंग कमीशन की सिफ़ारिश से की गई थी। जब 1926 में ये कमीशन भारत में आया तब इसे रॉयल कमीशन ऑन इंडियन करेंसी एंड फिनांस के नाम से जाना गया।
♦️RBI की स्थापना भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 1 अप्रैल, 1935 को हुई थी। रिज़र्व बैंक का केंद्रीय कार्यालय प्रारंभ में कोलकाता में स्थपित किया गया था जिसे 1937 में स्थायी रूप से मुंबई में स्थानांतरित किया गया। 
नोट:- केंद्रीय कार्यालय वह कार्यालय है जहां गवर्नर बैठते हैं और जहां नीतियाँ निर्धारित की जाती हैं।
♦️यद्यपि प्रारंभ में यह निजी स्वमित्व वाला बैंक था, जिसे 1949 में राष्ट्रीयकरण के बाद से इस पर भारत सरकार का पूर्ण स्वमित्व स्थापित हो गया।
♦️वर्तमान में RBI के गवर्नर श्री शक्तिकांत दास है, जो RBI के 25 वें गवर्नर है।
इन्होंने यह पद 24 वें गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफ़े के बाद धारण किया है।