वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2019

वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2019

वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2019

 

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में UNDP द्वारा वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2019 को जारी किया गया है, इस रेपोर्ट के अनुसार भारत की स्थिति में सुधार हुआ है।


मुख्य बिन्दु:-

◾️ MPI ( Multidimensional Poverty Index/ वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक ) को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (United Nations Development Programme- UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल ( Oxford Poverty and Human Development Initiative- OPHI) द्वारा विकसित किया जाता है।
◾️MPI की पिछली रेपोर्ट 2005-06 की तुलना में 2015-16 की रेपोर्ट में सुधार हुआ है।
◾️ भारत का MPI मूल्य 2005-06 में 0.283 था जो 2015-16 में घटकर 0.123 हो गया था।
◾️ भारत में 2005-06 से 2015-16 के दौरान भारत के सबसे गरीब वर्गों जैसे- मुसलमानों और अनुसूचित जनजातियों ने गरीबी को कम करने में सबसे अधिक योगदान दिया है।
◾️इन दस वर्षों के दौरान भारत में कुल 271 मिलियन (27.10 करोड़) लोग गरीबी सूचकांक से बाहर आए।
◾️इस सूचकांक में मूलभूत उद्देश्यों पर ज़्यादा ध्यान दिया गया था।
◾️ 2005-06 में भारत में 292 मिलियन गरीब बच्चे थे, जबकि 2015-16 में इनकी संख्या घटकर 136 मिलियन हो गई अर्थात नवीनतम आँकड़ो में पहले की अपेक्षा 47 % की कमी पाई गई है।
◾️वैश्विक MPI में कुल 105 देश शामिल हैं, जो दुनिया की आबादी का 77 प्रतिशत या 5.7 बिलियन हैं। इस अनुपात में 23 प्रतिशत लोगों (1.3 बिलियन) की पहचान बहुसंख्यक गरीब के रूप में की जाती है।