POCSO अधिनियम, 2012 में संशोधन

POCSO अधिनियम, 2012 में संशोधन

बाल यौन अपराध संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 में संशोधन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी

आज के समय को आप और हम काफी अच्छे तरह से जानते की किस तरह से आज के समय में बच्चों के साथ कैसे कैसे दुर्व्यवहार हो रहे हैl और ऐसा करने वाले हमारे में से ही है जो हमारे बीच रह कर ऐसे घटिया काम कर रहे हैl आज भारत में बच्चों के खिलाफ यौन अपराध बहुत ज्यादा बढ़ रह है और रिपोर्ट उतनी ही कम हो रही हैl क्यों ?

क्योंकी इन अपराधों को जन्म देना वाला हमारे ही  नजदीकी रिश्तेदार या जान पहचान वाला होता है या फिर परिवार का ही सदस्यl 53 प्रतिशत बच्चों ने स्वीकार किया कि उन्होने अपने जीवन में एक या किसी न किसी प्रकार के यौन अपराधों को भुगता है और ऐसा एक सर्वे की रिपोर्ट के दौरान सामने आया हैl

ये दुर्व्यहार ज़िंदगी भर कही न कही बच्चे के मानस को झकझोरता रहता है जिससे वो किसी न किसी बड़ी बीमारी का शिकार हो जाता है. संज्ञानात्मक हानि, अवसाद, चिंता, शर्म और ग्लानि महसूस करना तथा कमजोर पारस्परिक संबंध और आत्म सम्मान मे कमी यौन दुर्व्यवहार से पीड़ित बच्चों के अन्य परिणाम हैं। 

लेकिन सरकर ने इस दुर्व्यहार को बहुत ही संगीन अपराध बताया है और इन अपराधों को बंद करने के लिए बाल यौन अपराध संरक्षण (पोक्‍सो) अधिनियम, 2012 में संशोधन किया है  और  केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रैल 2014 में  इस एक्ट को मंजूरी दे दी हैl

क्या है POCSO एक्ट

वर्ष 2012 से पहले बाल यौन शोषण पर कोई स्पष्ट कानून नहीं था l  इसलिए बच्चों से जुड़े मामलों की की कारवाही भारतीय दंड सहिंता के अंतर्गत बलात्कार (धारा 375) और महिला की गरिमा का हनन (धारा 374)  जैसी धाराओं के अंतर्गत की जाती थी l खास कानून नहीं होने पर बाल यौन शोषण पर क़ानूनी कार्यवाही करना मुश्किल था l

पर अब यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण, बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों को रोकने के लिए एक प्रत्यक्ष एवं आसान शिकायत प्रबंधन प्रणाली शुरु की गई है जो की POCSO एक्ट हैl

POCSO एक्ट का पूरा नाम "The Protection Of Children From Sexual Offences Act" या प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट हैl

इस एक्ट के जरिये बच्चों के प्रति यौन उत्पीड़न और यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे जघन्य अपराधों को रोकने के लिए, महिला और बाल विकास मंत्रालय ने बनाया हैl  वर्ष 2012 में बनाए गए इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई हैl 

अब 12 साल तक के बच्चे से रेप या अन्य प्रकार का यौन शोषण होने पर दोषियों को मौत की सजा मिलेगी l

पोक्सो अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत वो मामले पंजीकृत किए जाते हैं जिनमें बच्चों के गुप्तांग से छेडछाड़ की जाती है, इस धारा के आरोपियों पर दोष सिद्ध हो जाने पर 5 से 7 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता हैl इस एक्ट को बनाना इसलिए भी जरूरी था क्योंकि बच्चे बहुत ही मासूम होते हैं और आसानी से लोगों के बहकाबे में आ जाते हैंl  कई बार तो बच्चे डर के कारण उनके साथ हुए शोषण को माता पिता को बताते भी नही हैl

यौन शोषण क्या है?

इसमें यौन उत्पीड़न और अश्लील साहित्य, सेक्सुअल और गैर सेक्सुअल हमला (penetrative and non-penetrative assault) को शामिल किया गया हैl

POCSO एक्ट के प्रावधान

  1. भारतीय दंड संहिता, 1860 के अनुसार सहमती से सेक्स करने की उम्र को 16 वर्ष से बढाकर 18 वर्ष कर दिया हैl यदि कोई व्यक्ति किसी बच्चे के साथ उसकी सहमती या बिना सहमती के यौन कृत्य करता है तो उसको पोक्सो एक्ट के अनुसार सजा मिलेगी l
  2. यदि कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी 18 वर्ष  से कम उम्र के साथ जबरदस्ती यौन संबध बनाते है तो यह भी अपराध की श्रेणी में आता है और उस पर मुकदमा चलाया जा सकता हैl 
  3. सभी अपराधों की सुनवाई, एक विशेष न्यायालय द्वारा कैमरे के सामने बच्चे के माता पिता या जिन लोगों पर बच्चा भरोसा करता है, उनकी उपस्थिति में होगीl
  4. यदि अभियुक्त एक किशोर है, तो उसके ऊपर किशोर न्यायालय अधिनियम, 2000 (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) में मुकदमा चलाया जाएगा l
  5. यदि अपराधी ने कुछ ऐसा अपराध किया है जो कि बाल अपराध कानून के अलावा अन्य कानून में भी अपराध है तो अपराधी को सजा उस कानून में तहत होगी जो कि सबसे सख्त हो l
  6. इसमें खुद को निर्दोष साबित करने का दायित्व अभियुक्त (accused) पर होता हैl इसमें झूठा आरोप लगाने, झूठी जानकारी देने तथा किसी की छवि को ख़राब करने के लिए सजा का प्रावधान भी हैl
  7. जो लोग यौन प्रयोजनों के लिए बच्चों का व्यापार (child trafficking) करते हैं उनके लिए भी सख्त सजा का प्रावधान हैl 
  8. सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय बाल संरक्षण मानकों के अनुरूप, इस अधिनियम में यह प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति यह जनता है कि किसी बच्चे का यौन शोषण हुआ है तो उसके इसकी रिपोर्ट नजदीकी थाने में देनी चाहिए, यदि वो ऐसा नही करता है तो उसे छह महीने की कारावास और आर्थिक दंड लगाया जा सकता हैl
  9. यह अधिनियम बाल संरक्षक की जिम्मेदारी पुलिस को सौंपता है. इसमें पुलिस को बच्चे की देखभाल और संरक्षण के लिए तत्काल व्यवस्था बनाने की ज़िम्मेदारी दी जाती हैl जैसे बच्चे के लिए आपातकालीन चिकित्सा उपचार प्राप्त करना और बच्चे को आश्रय गृह में रखना इत्यादि l
  10. पुलिस की यह जिम्मेदारी बनती है कि मामले को 24 घंटे के अन्दर बाल कल्याण समिति (CWC) की निगरानी में लाये ताकि CWC बच्चे की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठा सके l
  11. इस अधिनियम में बच्चे की मेडिकल जांच के लिए प्रावधान भी किए गए हैं, जो कि इस तरह की हो ताकि बच्चे के लिए कम से कम पीड़ादायक हो l मेडिकल जांच बच्चे के माता-पिता या किसी अन्य व्यक्ति की उपस्थिति में किया जाना चाहिए, जिस पर बच्चे का विश्वास हो, और बच्ची की मेडिकल जांच महिला चिकित्सक द्वारा ही की जानी चाहिए l
  12. अधिनियम में यह कहा गया है कि बच्चे के यौन शोषण का मामला घटना घटने की तारीख से एक वर्ष के भीतर निपटाया जाना चाहिए l
  13. पोक्सो के अंतर्गत बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के 6118 मामले 2012 से 2016 के बीच दर्ज किये गए हैंl इसमें 85% मामले अभी भी कोर्ट में लंबित पड़े हुए है जबकि अपराधी को सजा मिलने की दर सिर्फ 2% है जो कि किसी भी तरह से ठीक नही ठहराया जा सकता हैl