देश को मिला पहला लोकपाल/ Country gets the first Lokpal

देश को मिला पहला लोकपाल/ Country gets the first Lokpal

देश को मिला पहला लोकपाल


सन्दर्भ

हाल ही प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष को देश के पहले लोकपाल के रूप में नामित किया है, जिसे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विधिवत मंज़ूरी दे दी है। 
♦️लोकपाल में अध्यक्ष के अलावा चार न्यायिक और चार गैर-न्यायिक सदस्य भी नियुक्त किये गए हैं। न्यायिक सदस्यों में जस्टिस दिलीप बी. भोसले, जस्टिस प्रदीप कुमार मोहंती, जस्टिस अभिलाषा कुमारी और जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी हैं। जबकि गैर-न्यायिक सदस्यों में SSB की पूर्व प्रमुख अर्चना रामसुंदरम और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन तथा महेन्द्र सिंह और इंद्रजीत प्रसाद गौतम को भी गैर-न्यायिक सदस्य बनाया गया है। 
♦️इसी के साथ ही देश में लोकपाल नाम की संस्था अस्तित्व में आ गई है।

देश में लंबे समय से लटका हुआ था लोकपाल का मामला

♦️आज से लगभग साढ़े पाँच वर्ष पहले संसद ने लोकपाल कानून पारित कर दिया था, परन्तु इसके बावजूद भी लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो पा रही थी। 
♦️हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी लोकपाल के नाम पर सहमति देने वाली समिति के सदस्य हैं। ♦️लोकपाल की नियुक्ति की जो प्रक्रिया है, उसमें विपक्ष के नेता को भी एक सदस्य के रूप में नामित किये जाने का प्रावधान है। परन्तु 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद लोकसभा का जो गठन हुआ उस गणित के मुताबिक़ किसी भी दल को विपक्ष के नेता के रूप में दर्जा नहीं मिला।

♦️लोकसभा में प्रतिपक्ष का नेता बनने के लिये लोकसभा के कुल सदस्यों की संख्या का कम-से-कम 10% होना ज़रूरी है। 
♦️परन्तु हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के 2017 में दिये एक फैसले से स्पष्ट होता है कि संसद में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी का नेता ही प्रतिपक्ष का नेता कहलाएगा। 


लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ 

♦️इसके मुताबिक़ केंद्र में लोकपाल और राज्य स्तर पर लोकायुक्त होंगे।
♦️ लोकपाल में एक अध्यक्ष तथा अधिकतम आठ सदस्य होंगे, जिनमें से 50 प्रतिशत न्यायिक सदस्य होंगे, जों अनुसूचित जाति /जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों और महिलाओं में से होंगे।
♦️ देश में CBI सहित किसी भी जाँच एजेंसी को लोकपाल द्वारा भेजे गए मामलों की निगरानी करने और निर्देश देने का लोकपाल को अधिकार होगा।


लोकपाल के प्रमुख अधिकार

कोई भी सामान्य व्यक्ति जनसेवकों के भ्रष्टाचार से लेकर अन्य किसी भी स्तर के भ्रष्टाचार को लेकर लोकपाल से शिकायत कर सकेगा। 
♦️शिकायत किस प्रकार से की जाएगी, यह लोकपाल तय करेगा और इसकी जानकारी दी जाएगी। भ्रष्टाचार के मामले में लोकपाल खुद भी संज्ञान लेने में सक्षम होगा। 

♦️अनुशासनात्मक कार्रवाई:- इसके अनुसार लोकपाल जाँच के दौरान आरोपी अधिकारियों के तबादले, अनुशासनात्मक कार्रवाई या निलंबन का आदेश भी दे सकेगा।
♦️सज़ा:- इसमें भ्रष्टाचार के मामलों में दो से 10 वर्ष तक की सज़ा के प्रावधान संभव है।
♦️ज़ब्ती:- इस जाँच में लोकसेवक के भ्रष्ट तरीकों से अर्जित संपत्ति का पता चलने पर लोकपाल उसे ज़ब्त करेगा।
♦️शाखाएँ:- लोकपाल देश के अन्य हिस्सों में भी अपनी शाखाएँ खोलने का निर्णय ले सकता है।