ईरान पर आर्थिक संकट तथा वैश्विक राजनीति

ईरान पर आर्थिक संकट तथा वैश्विक राजनीति

वैश्विक राजनीति और ईरान


चर्चा में क्यों ?

हाल में विश्व के विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों नें भारतीय विदेश नीति के समक्ष कुछ कठिन चुनौतियों को जन्म दिया है। जिनमे प्रमुख हैं- ईरान तेल संकट, अमेरिकी द्विपक्षीय व्यापार तथा चीन की मुखर होती नीति। 
♦️इन्ही चुनौतियों के कारण भारतीय हितों को वैश्विक स्तर पर साधने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जिसकी एक प्रमुख वजह अमेरिकी ट्रंप प्रशासन की नीतियाँ है।
♦️ ट्रंप प्रशासन की नीतियों ने विश्व के समक्ष अनिश्चितता के माहौल को जन्म दिया है, जिसके फलस्वरूप भारत के हित भी प्रभावित हो रहे है।


ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति 

♦️ट्रंप प्रशासन की विभिन्न नीतियों का वैश्विक स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। जिसके कारण अमेरिका के मित्र राष्ट्र भी इससे प्रभावित हुए हैं, जर्मनी और फ्राँस यहाँ तक की ब्रिटेन भी अमेरिकी नीतियों से असंतुष्ट हैं। 
♦️अमेरिका ने ईरान पर बैंकिंग प्रतिबंध आरोपित किए है, जिनके चलते ईरान से तेल का आयात करना लगभग असंभव हो गया है। परन्तु भारत के समक्ष इराक, सऊदी अरब, तथा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का विकल्प अब भी उपलब्ध है, परन्तु ईरान से जो तेल प्राप्त होता है, वह भारत के लिये सस्ता है, तथा साथ ही समीप होने के कारण परिवहन की लागत भी अन्य स्रोतों की अपेक्षा कम पड़ती है।
♦️इन्ही प्रतिबंधो के चलते 20 जून को ईरान के क्षेत्र में अमेरिका के एक जासूसी ड्रोन को मार गिराया गया, जिसके चलते ट्रंप ने कुछ नये  प्रतिबंध लगाने का कदम उठाया। 
                    इसी के चलते खाड़ी देशों तथा ओमान की खाड़ी क्षेत्र में राजनीतिक संकट खड़ा हुआ है।
♦️ अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार अमेरिकी सरकार का मानना है कि खाड़ी में हुए हमलों के लिए ईरान जिम्मेदार है, क्योंकि हाल में ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर तनाव बढ़ा है। 
♦️अमेरिका ने साल 2018 में ईरान परमाणु समझौते से स्वयं को अलग कर लिया था। वही दूसरी और अमेरिका ईरान पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का उल्लंघन करने का आरोप लगाता रहा है।